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Sunday, February 6, 2011

एक और नई शुरुआत करें

अमरीका के थॉमस अल्वा एडिसन इतिहास के सबसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों में शुमार होते हैं, जिनके बनाए बिजली के बल्ब ने पूरी दुनिया को नई रोशनी दी। एडिसन के नाम अकेले अमरीका में ही 1,093 आविष्कारों के पेटेंट हैं।


यह 1914 के दिसंबर महीने की बात है। एडिसन की फैक्टरीनुमा प्रयोगशाला में आग लग गई और वह लगभग पूरी तरह से तबाह हो गई। एडिसन के 24 वर्षीय बेटे चाल्र्स को ध्यान आया कि उसके पिता कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। वह धुएं और उड़ती राख़ के बीच उन्हें पागलों की तरह तलाश रहा था।


आख़िर उसने उन्हें, अपने पिता थॉमस अल्वा एडिसन को खोज निकाला। लपटों की रोशनी में उनका चेहरा चमक रहा था। वे तब 67 साल के थे। जवानी उनसे बहुत दूर जा चुकी थी। और हर चीÊा आग की भेंट चढ़ चुकी थी।


चाल्र्स को देखते ही एडिसन चिल्लाए, ‘चाल्र्स तुम्हारी मां कहां हैं?’
चाल्र्स ने जब बताया कि उसे नहीं मालूम, तो उन्होंने कहा, ‘उन्हें ढूंढ़ कर यहां ले आओ। तुम्हारी मां ने अपने पूरे जीवन में ऐसा नÊारा नहीं देखा होगा!’


अगली सुबह तक आग की लपटें ठंडी हो गईं, पर उससे पहले सबकुछ बर्बाद कर गई थीं। फैक्टरी की खंडहर हो चुकी इमारत को देखते हुए एडिसन बोले, ‘ऐसी तबाही का भी बहुत महत्व है। हमारी सारी ग़लतियां जलकर खाक हो जाती हैं। भगवान का शुक्र है कि अब हम नई शुरुआत कर सकते हैं।’
और इस भीषण अग्निकांड के महज तीन ह़फ्ते बाद ही एडिसन ने फोनोग्राफ का आविष्कार कर दिखाया।



जो बीत गया, चला गया, उसका दुख मनाने से क्या फ़ायदा? हर दिन एक नया दिन होता है और किसी भी दिन, किसी भी आयु में, किसी भी परिस्थिति में जीवन की नई शुरुआत हो सकती है।