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Sunday, June 13, 2010

खोल से बाहर निकालने का तरीक़ा

जाड़े के दिन थे। एक छोटे बच्चे को कहीं पर एक छोटा कछुआ मिल गया। कछुआ अपनी राह जा रहा था। बच्चे ने उसे देखा, तो हाथों में उठा लिया। उसका स्पर्श पाते ही कछुआ अपने स्वभाव के अनुरूप तुरंत खोल में घुस गया। बच्चे ने लाख कोशिश कर ली, पर उसने मुंह और हाथ-पैर बाहर नहीं निकाले। उसने उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की, लकड़ी से कुरेदा, पर कछुआ टस से मस न हुआ। हारकर वह बच्च उसे अपने घर ले आया। उसका ख्याल था कि घर में कछुआ कभी तो खोल से बाहर निकलेगा। लेकिन वहां वह चेहरा जरा सा बाहर निकालता और आसपास देखते ही फिर अंदर कर लेता। बच्चे ने उसके सामने खाना-पानी रखा, पर कोई असर न हुआ।

बच्च बड़ी देर तक इंतजार करता रहा। उसके चाचा उसे लगातार देख रहे थे। आख़िरकार वे बोले, ‘कछुआ भले ही मर जाएगा, पर इस तरह से खोल से बाहर नहीं आएगा। आओ, मैं तुम्हें बताता हूं, उसे बाहर निकालने का सही तरीक़ा क्या है।’ चाचा ने कछुए को उठाया और उसे अंगीठी के पास रख दिया। जाड़े के दिन थे। कछुए को थोड़ी गर्मी का एहसास हुआ, तो उसने पहले सिर निकाला और फिर धीरे से हाथ-पैर भी बाहर निकाल लिए।

बच्च हैरान था कि यह कैसे हो गया। जिस काम के लिए वह घंटे भर से कोशिश कर रहा था फिर भी नाकामयाब रहा, वह पांच मिनट में हो गया। चाचा ने उसे बताया, ‘कछुए ऐसे ही खोल से बाहर आते हैं और इंसान भी। आप उनसे जबरदस्ती कुछ नहीं करा सकते। पहले आपको उन्हें दयालुता के साथ गर्मजोशी देनी पड़ती है, तभी वे आपसे खुलते हैं।’


लोगों को आप जितना भी खिला-पिला लें, घर ले जाएं, आव-भगत कर लें, पर वे तब तक आपसे नहीं खुलेंगे, जब तक कि उनसे गर्मजोशी व आत्मीयता का व्यवहार
न किया जाए

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