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Friday, February 4, 2011

क्या कहा गया और क्या अर्थ था

एक पहाड़ी रास्ते पर गाड़ियां आ-जा रही थीं। रास्ता बहुत घुमावदार था। अगले मोड़ से आगे क्या है, वाहन चालकों को कुछ अंदाज ही न हो पा रहा था। ऐसे में लोग न सिर्फ़ धीरे-धीरे गाड़ी चला रहे थे, बल्कि अन्य सावधानियां भी रख रहे थे। आने-जाने वाले वाहन चालक भी जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे से सूचनाएं साझा कर लेते थे।


ऐसे में, पहाड़ के ऊपर की तरफ़ से आती एक कार के ड्राइवर ने चलती गाड़ी की खिड़की से मुंह निकाला और नीचे से ऊपर की ओर जा रही गाड़ी के ड्राइवर की ओर देखते हुए जोर से चिल्लाया- ‘सुअर!’ उसने ऐसा पीछे की ओर आती गाड़ी को देखकर भी किया। यह सुनते ही अगले ड्राइवर की त्यौरियां चढ़ गईं।


उसे हैरानी हुई कि बग़ैर किसी कारण के उसे सुअर कहा गया और हैरानी से भी बढ़कर ग़ुस्सा आया। सो, उसने भी तत्काल खिड़की से सिर बाहर निकाला और चीख़ पड़ा- ‘कुत्ता।’


तब तक दोनों एक-दूसरे के पास से गुजर चुके थे। पहाड़ी रास्ता था। बीच में गाड़ी रोकी भी नहीं जा सकती थी। ‘सुअर’ सुनने वाले ड्राइवर को अब भी आश्चर्य हो रहा था कि उसे बेवजह ऐसा क्यों कहा गया। फिर उसने सोचा कि ऐसा करना उसकी आदत होगी, क्योंकि उसने पीछे आ रही गाड़ी के ड्राइवर के लिए भी यही कहा था।


उसने सोचा, दुनिया में भी अजीब लोग होते हैं। वह ऐसा सोचते हुए जा रहा था कि अचानक झाड़ियों से निकलकर एक सुअर सड़क पर आ गया और उसकी गाड़ी से टकराते-टकराते बचा। तब उसे समझ में आया कि उस ड्राइवर ने उसे सुअर कहकर गाली नहीं दी थी, बल्कि चेताया था।



किसी के शब्दों पर नहीं, उसकी भावनाओं पर ध्यान दें। शब्द और लहजा रूखा हो सकता है, लेकिन प्रतिक्रिया से पहले देख लें कि उन शब्दों का उद्देश्य हमारी ही भलाई तो नहीं

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