एक बार की बात है युवा कारोबारियों के एक समूह को संबोधित करने के लिए एक सुप्रसिद्घ वक्ता को बुलाया गया। लोग यह देखकर चकित रह गए कि उनके हाथ में न कोई कागज था, न कोई खास तैयारी। वह एकदम सादे कपड़ों में सूटबूटधारी नौजवान व्यवसायियों से मिलने आए थे। बस उनके हाथ में 100 रुपए का एक नोट था।
उन्होंने सामने बैठे श्रोताओं की ओर नोट को लहराते हुए कहा, ‘आपमें से कौन इस नोट को लेना चाहेगा?’ सारे हाथ उठ गए। तभी उन्होंने उस 100 के नोट को अपने हाथों से एकदम मसल दिया। उसके बाद उसे हवा में लहराकर फिर पुराना सवाल उछाला। अभी भी सारे लोग उस नोट को लेने के लिए उत्सुक थे। अब उन्होंने उस नोट को जमीन पर गिराकर जूते से बुरी तरह मसला और एक बार फिर चुनौती भरे स्वर में पूछा,‘अब आप लोगों में से कितने लोग यह नोट लेना चाहते हैं?’ एक बार फिर सारे लोगों ने उसे लेने की इच्छा जताई।
मानो अब भी उनका मन नहीं भरा हो। अब बारी थी वक्ता के मुस्कराने की। उन्होंने लोगों से कहा, ‘मित्रो, आप सबने एक बहुत महžवपूर्ण सबक सीखा है। इस नोट की तरह ही आपका, हम सबका जीवन भी अनमोल है। इस नोट की तरह ही जीवन में आपके स्वाभिमान को भी कई बार ठेस लगती है। वह कुचला जाता है, उसे रौंदा जाता है। लेकिन यह याद रखिए उससे आपकी कीमत कभी कम नहीं होती। ठीक उसी तरह जैसे इस नोट की कीमत कम नहीं हुई। इसलिए खुद को कभी भी कम करके मत आंकिए। आप वही रहेंगे जो आप हैं।
1 comment:
It is a great thing that I have read same thought some years ago and again read same sentences. Keep it up. Thanks to share such good thought. It will inspire some other people specially to MBA student including me.
Post a Comment