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Tuesday, June 8, 2010

पहनावा देखकर धारणा न बनाएं

धूसर से रंग के कपड़े पहने हुए एक महिला और घर में बना साधारण सा सूट पहने उनके पति हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट के ऑफिस पहुंचे। उन्होंने इसके लिए पहले से कोई इजाजत नहीं ली थी। इस दंपती को देखते ही सेक्रेटरी ने सोचा ऐसे साधारण लोगों का हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कोई काम नहीं हो सकता।

आगंतुक शख्स ने विन्रम स्वर में उससे कहा, ‘हम प्रेसीडेंट से मिलना चाहते हैं।’ सेक्रेटरी ने बेहद रूखे तरीके से जवाब दिया ‘वह पूरे दिन बेहद व्यस्त रहेंगे।’ महिला ने कहा, ‘हम इंतजार करेंगे।’ सेक्रेटरी ने दोनों को कई घंटों तक नजरअंदाज किया, यह सोचते हुए कि हारकर अंतत: वे वापस चले जाएंगे। वे दोनों तो वापस नहीं गए, लिहाजा सेक्रेटरी कुढ़ते हुए प्रेसीडेंट के पास पहुंची।

वह प्रेसीडेंट से बोलीं ‘अगर आप इन लोगों को कुछ मिनट का समय दे दें तो शायद यह वापस चले जाएंगे।’ प्रेसीडेंट ने बेहद कठोर अंदाज में दंपती की ओर देखा। उक्त महिला ने बताया ‘हमारा एक बेटा था, जिसने हार्वर्ड में एक साल पढ़ाई की थी।

उसे इस जगह से बहुत प्यार था और यहां बेहद खुश रहता था। लेकिन बदनसीबी से पिछले वर्ष एक दुर्घटना में वह मारा गया। मैं और मेरे पति उसकी याद में यूनिवर्सिटी प्रांगण में ही एक स्मारक खड़ा करना चाहते हैं।’

प्रेसीडेंट को यह बात छू गई, लेकिन वह हैरान होते हुए बोले ‘मैडम, हम हार्वर्ड में पढ़े और अब दुनिया को अलविदा कह चुके हर शख्स की मूर्ति नहीं बनवा सकते। ऐसा करने पर यह जगह किसी समाधि क्षेत्र जैसी लगने लगेगी।’ इस पर महिला जल्दी से बोलीं, ‘अरे नहीं, हम कोई मूर्ति नहीं लगावाना चाहते।

हम तो हार्वर्ड को उसकी याद में एक इमारत देना चाहते हैं।’ प्रेसीडेंट की आंखें फैल गईं। उन्होंने दोनों के बेहद सादे लिबास की ओर नजर दौड़ाई और बोले - ‘इमारत! क्या आपको अनुमान है कि एक इमारत की क्या लागत होती है। हार्वर्ड की इस इमारत की लागत तकरीबन साढ़े सात मिलियन डॉलर है।’

कुछ समय के लिए महिला ने चुप्पी साध ली। प्रेसीडंेट खुश हो गए। उन्हें लगा कि अब तो इस बुजुर्ग दंपती से निजात मिल ही जाएगी। महिला अपने पति की तरफ मुखातिब होते हुए बोली, ‘यूनिवर्सिटी शुरू करने में सिर्फ इतना ही पैसा लगता है। फिर हम खुद ही यूनिवर्सिटी शुरू क्यों नहीं कर लेते?’ पति ने भी रजामंदी में सिर हिलाया।

यह सुनते ही प्रेसीडेंट के चेहरे पर भ्रम और हैरानी के भाव तैरने लगे। लीलैंड स्टेनफोर्ड दंपती उठे और वहां से चले गए। उन्होंने पेलो एल्टो, कैलिफोर्निया जाकर एक यूनिवर्सिटी की स्थापना की, जिसे आज दुनिया स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नाम से जानती है। जिस दंपती के बेटे का स्मारक बनाने में हार्वर्ड ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, उसकी यादगार है यह स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी।

फंडा यह है कि... पहनावे और बाहरी रूप-रंग से लोगों के बारे में कोई अनुमान लगाना भ्रामक हो सकता है। इस तरह आकलन करने से हम अच्छे दोस्त, कुशल कर्मचारी और बढ़िया ग्राहकों को खो सकते हैं

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