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Tuesday, June 22, 2010

सबसे क़ीमती क्या पिता के लिए?

एक धनी पिता-पुत्र को चित्रकला से बहुत लगाव था। वे सारी दुनिया में घूमते और हर जगह के जाने-माने चित्रकारों की कृतियां ख़रीदकर घर ले आते। एक बार पुत्र को मातृभूमि की रक्षा की ख़ातिर मोर्चे पर जाना पड़ा, लेकिन वहां से वह वापस नहीं लौटा, उसकी मौत की ख़बर ही आई। पिता अब इस दुनिया में अकेला था। उसके लिए सारा कला-संग्रह बेमानी हो गया था। एक दिन उसके बेटे के दोस्त ने दरवाजे पर दस्तक दी।

वह पिता के लिए उसके बेटे का पोर्ट्रेट उपहार में लाया था, जिसे उसने ख़ुद बनाया था। पेंटिंग देखकर पिता को लगा कि उसका पुत्र वापस आ गया है। लेकिन उसके जीवन का अकेलापन कम न हुआ। कुछ दिनों बाद पिता की मौत हो गई। और कुछ दिनों बाद उसकी वसीयत के अनुसार उसके संग्रह के तमाम चित्रों की नीलामी हो रही थी। लोग महान चित्रकारों की कृतियां ख़रीदने को उत्सुक थे।

लेकिन नीलामीकर्ता ने बोली शुरू की बेटे के पोर्ट्रेट से, जिसे ख़रीदने को कोई उत्सुक न था। लोग तो पिकासो, वान गॉग, मॉने वग़ैरह की कृतियां लेना चाहते थे। शोर-शराबा बढ़ गया। आख़िर पिता के एक दोस्त ने सिर्फ़ 500 रुपए में वह पोर्ट्रेट ख़रीद लिया।

अब लोग सतर्क हो गए। सबको लगा कि अब प्रसिद्ध कृतियों की नीलामी होगी, नीलामी समाप्त होने की घोषणा से उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। जब वे आपत्ति करने लगे, तो नीलामीकर्ता ने बताया कि पिता की वसीयत के अनुसार, जो व्यक्ति उसके पुत्र के चित्र को ख़रीदेगा, उसे शेष सारी कृतियां मु़फ्त में दे दी जाएंगी। और किसी भी क़ीमत पर उन कृतियों को ख़रीदने के लिए खड़े लोग यह जानकर हैरत में पड़ गए। जाहिर है, किसी भी पिता के लिए उसका पुत्र सबसे क़ीमती होता है।


पिता के लिए सबसे अहम, सबसे क़ीमती होती है संतान। संतान की बेहतरी के लिए पिता सबकुछ कुर्बान कर सकता है, उसकी रक्षा के लिए कुछ भी कर सकता है

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